किस्सा कचौड़ी का : The Kachori Story !

    By – Bhawna Raikawar       

भारतीय व्यंजन दुनियाभर में अपने बेहतरीन ज़ायके और उनमे पड़ने वाले मसालो के लिए मशहूर है। आज वैश्वीकरण के दौर में जहाँ एक ओर फास्ट फूड हमारी रसोइयों और रेस्टॉरेंट में घर कर गए है वही दूसरी ओर हमारे स्नैक्स और स्ट्रीट फूड अपने लाजवाब स्वाद से इन्हे जबरदस्त टक्कर दे रहे है। पुराने समय से ही पकवान भारत में बहुत प्रचलित रहे है तथा इनके बिना हिंदुस्तानी व्यंजनों की कल्पना ही अधूरी है।

आइये बात करते है उस स्नैक की जो मशहूर है अपने चटपटे मसालेदार कुछ खट्टे मीठे तथा कुछ तीखे स्वाद के लिए। जी हाँ , हम बात कर रहे है कचौड़ी की।

माना जाता है कि कचौड़ी का इजाद राजस्थान तथा उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों में हुआ। अतः यह पूर्णतः उपमहद्वीपीय है। कई फूड हिस्टोरियंस का मानना है की कचौड़ी भरवा पूरी का ही विकसित रूप है परन्तु इस बात पर सभी एक मत नहीं है क्योकि  कचौड़ी बाहर से पूरी के मुकाबले अधिक सख्त होती है। एक मतानुसार उरद दाल की कचौड़ी सर्वप्रथम मारवाड़ियो द्वारा बनाई एवं खाई जाती थी तथा पेशे से व्यापारी होने के कारण ये मारवाड़ी लोग अपने सफर में कचौड़ी अपने साथ बांधकर ले जाया करते थे जिससे धीरे धीरे कर यह पकवान पंहुचा हिंदुस्तान के कई अन्य क्षेत्रों में जहाँ यह अपने अलग रूप में वहां की संस्कृति और माहौल के साथ ढल गया तथा इससे विकास हुआ कचौड़ी की कई किस्मो का।

कचौड़ी दिल्ली का एक मुख्य स्नैक और स्ट्रीट फूड है। दिल्लीवालों की सुबह का नाश्ता अधूरा  है चटपटी आलू की सब्जी में पड़ी हुई स्वादिष्ठ उरद दाल की खस्ता कचौड़ी के बिना जिसका साथ निभाती है उसमे सजी कुछ प्याज और हरी मिर्च। सुबह सुबह घर से निकलते चाहे दफतर हो स्कूल हो या हो कॉलेज के स्टूडेंट चखते हुए जाते है उस लुभावनी कचौड़ी  का स्वाद जो इंतज़ार में होती है उनके न जाने कब से। खस्ता कचौड़ी दिल्ली की सड़को पर बिकने वाली सबसे मशहूर स्नैक है। इसे बनाने में उरद अथवा मूंग दाल का मसाला मैदे की लोई में भरकर उथला तला जाता है। इसे कई दिनों तक खाया जा सकता है। इसी प्रकार से होती है हींग कचौड़ी जो दाल कचौड़ी में अपने छोटे से भाग के बावजूद भी पूरा क्रेडिट खुद ही ले जाती है

नागोरी कचौड़ी दिल्ली की खास कचौड़ी है जिसे सुबह नाश्ते में खाया जाता है सूजी के हलवे के साथ तथा स्वाद में ये अत्यंत कुरकुरी होती है ।

आइये अब रूबरू होते है उन कचौड़ियो से जो पाई जाती है भारत के अन्य राज्यों में तथा मेहमान बनकर आयी ये मोहतरमा ढीट बनकर अपना हक़्क़ जमा चुकी है उन व्यंजनों में जिनसे कभी ये बिलकुल ही अनजान थी। 

प्याज़ कचौड़ी प्रसिद्ध है राजस्थान , उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश में। जहाँ इसका मसाला बनाया जाता है

अधिक प्याज तथा थोड़े आलू में अन्य सामग्रियों को मिलाकर।

मावा कचौड़ी जोधपुर में अपनी अनूठी मिठास के लिए मशहूर है। मावे की यह कचौड़ी चासनी में डूबी एक मिठाई है।

बनारसी कचौड़ी जैसे की इसके नाम से ही पता चलता है बनारस की यह कचौड़ी रूप में पूरी की तरह दिखने वाली सामान्यत थोड़ी छोटी ही होती है। तथा इसमें भरे जाने वाले मसाले की मात्रा भी कम होती हैं। इस कचौड़ी का लुफ्त आप बनारस की संकरी गलियों की छोटी छोटी मिठाई की दुकानों पर उठा सकते है।

मटर कचौड़ी पश्चिम बंगाल में मिलने वाली कचौड़ी का एक प्रकार है। जिसका मसाला मटर को दूसरे मसलो के साथ तल कर उसके छोटे छोटे टुकड़े कर तैयार किया जाता है तथा इसे धनिया तथा इमली की चटनी के साथ सर्व किया जाता है।

सत्तू कचौड़ी बिहार में अत्यधिक पसंद की जाती है। इसमें सत्तू का मसाला बनाकर भरा जाता है। इसकी खासियत यह है कि दाल कचौड़ी के सामान इसे भी कई दिनों तक खाया जा सकता है।

शेगाव कचौड़ी महाराष्ट्र की मशहूर कचौड़ी है जिसका इजाद शेरगाव स्टेशन के पास हुआ जिससे इसका नाम शेगाव कचौड़ी पड़ा ।

कचौड़ी की चर्चा अधूरी है राज कचौड़ी के बिना। कहा जाता है कि इसका इजाद उत्तर प्रदेश में हुआ।  यह राज कचौड़ी अनेक स्वादों की भरमार, दिल्ली की चाट की शोभा बढ़ती है अपने मनभावन स्वाद से। दिखने में गोलगप्पा तथा स्वाद में पापड़ी चाट यह अपने अंदर लिए है ख़ज़ाने का पिटारा जिसमे शामिल है भुजिया, नमकीन, चना, दही, इमली तथा पुदीने की चटनी इत्यादि। यह दिल्ली की भांति ही प्रचलित है मध्य प्रदेश, पंजाब, गुजरात व राजस्थान में। इसका लुफ्त हम किसी भी लोकल मिठाई की दूकान से उठा सकते है। 

फ्यूज़न फ़ूड आज अत्यधिक नाम कमा रहा है हर कोई पारम्परिक भोजन के साथ अंतरराष्ट्रीय भोजन को मिलाकर नए खाने का इजाद कर रहा है। कचौड़ी भी इस फ्यूज़न से खुद को दूर नहीं रख पायी है जिससे चाट कचौड़ी, दही कचौड़ी, चीज़ बर्गर कचौड़ी, कीमा कचौड़ी, ड्राई फ्रूट कचौड़ी जैसी कचौड़ी की कई किस्मो का जन्म हुआ है ।

भारत के अलग अलग भागो में छोटी छोटी दुकानों से लेकर बड़े बड़े रेस्टॉरेंट में मिलने वाली कचौड़ी विख्यात है अपने बेहतरीन ज़ायके के लिए। राजस्थान से अपना सफर शुरू करने वाली ये कचौड़ी आज हिंदुस्तान के हर घर की रसोई में एक खास जगह बना चुकी है तथा इसकी लोकप्रियता का अंदाज़ा इस बात से भी लगाया जा सकता है आजकल फ़ैक्टरियो में तैयार कर इसका निर्यात विदेशो में भी किया जा रहा है। 

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